नथनी बन गुरूर तेरा बनता रहूँगा नथनी बन गुरूर तेरा बनता रहूँगा
मैं मैं
मैं अभिशप्ता.... मैं अभिशप्ता....
"कहता है कि इंसान मैं" "कहता है कि इंसान मैं"
जिस दिन से हुई मायके से विदाई, माथे पर सुहाग की बिंदिया सजाई। जिस दिन से हुई मायके से विदाई, माथे पर सुहाग की बिंदिया सजाई।
क्यों बुढ़ापे में हम मां-बाप को छोड़ आते हैं। क्यों बुढ़ापे में हम मां-बाप को छोड़ आते हैं।